Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
चेतस्ते दीपमुत्सृज्य विनिघ्नन्ति तमोऽञ्जनैः ।
विमूढाः कर्तुमुद्युक्ता ये हठाच्चेतसो जयम् ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश में मेव की नाई संविदाकाश में जब कुछ भी स्फुरित
नहीं होता, तब आकाश में कमल की नाई चिदाकाश में चित्त उत्पन्न नहीं होता