Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
ते निबध्नन्ति नागेन्द्रमुन्मत्तं बिसतन्तुभिः ।
चित्तं चित्तस्य वाऽदूरं संस्थितं स्वशरीरकम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
जब जगद्रूप
वस्तु में किसी पदार्थ की भावना नहीं होती, तब शून्य हृदयाकाश में चित्त कैसे उत्पन्न होगा ?