Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
साधयन्ति समुत्सृज्य युक्तिं ये तान्हठान्विदुः ।
भयाद्भयमुपायान्ति क्लेशात्क्लेशं व्रजन्ति ते ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, बस, इतना ही चित्त का स्वरूप मैं मानता हूँ कि राग से जगत्-रूपी वस्तु के अन्दर
आत्मरूप वस्तुत्व से भावना करना