Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
निर्धृतिं नाधिगच्छन्ति दुर्भगा इव जन्तवः ।
भ्रमन्ति गिरिकूटेषु फलपल्लवभोजनाः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, इस कारण कोई भी दृश्य युक्तियों से समर्थन
करने योग्य नहीं है, इस प्रकार की भावना कर रहे तथा आकाशकोश की नाईं अति स्वच्छ आत्मपदार्थ
में चित्त का उदय कैसे होगा ?