Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 55
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हिन्दी अर्थ
स्पन्दनधर्मवान् होने से हृदयगत राग आदि गुणों की प्रेरणा
करनेवाला प्राण संवित् का उद्बोधन करता है और क्रम से चित्तरूपी बालक उत्पन्न होता हे