Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 56
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हिन्दी अर्थ
हे
श्रीरामजी, उस प्रकार वासना और प्राणस्पन्द दोनों चित्त के कारण हैं, उनमें से किसी एक का क्षय हो
जाने पर दोनों का और उनके कार्य चित्त का विनाश हो जाता है