Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 72
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 72
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, यह भ्रान्तिज्ञान मिथ्यारूप है, उसका यथार्थ आत्मज्ञान से उस प्रकार विलय
हो जाता है, जिस प्रकार रज्जु और चन्द्र के निर्दोष दर्शन से रज्जु में सर्पभ्रान्ति ओर एक चन्द्र में
दो चन्द्ररूपता की भ्रान्ति का विलय हो जाता हे