Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 71
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 71
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
जैसे खिड़की आदि छिद्रो में से प्रविष्ट चन्द्र या सूर्य की किरणों की दण्डाकारता और
उसके भीतर घूम रहे त्रसरेणुओं की आकाररूपता प्रतीत होती है अथवा जैसे नौका में अवस्थित
पुरुष को पर्वत आदि अचल पदार्थो में स्पन्दन दिखाई पडता है, वैसे ही संवित् से संवेद्य प्रतीत होता
है