Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 70
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 70 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 70
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हिन्दी अर्थ
हे राघव, जैसे बालक को अपने संकल्प से जनित भ्रमसे ही वेताल का उद्भव होता है अथवा
जैसे स्थाणु मे पुरुषरूपता होती है, वैसे ही संकल्पजनित भ्रम से ही संवित की संवेद्यरूपता होती
है