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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 69

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 69

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे रघुनन्दन जिस विवेक अवस्था में अपने पारमार्थिक स्वरूप का अनुभव होता है, वह स्वस्वरूपानुभव भी अपने संकल्प से जनित स्वप्न के सदृश ही है, क्योकि अद्वय परमात्मा में स्वस्वरूपानुभव और विवेक आदि परमार्थतः नहीं हो सकते हैं