Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 68
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 68 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 68
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हिन्दी अर्थ
जिस तरह
स्वप्न मेँ अपना मरण ओर भिन्न देश में स्थिति दोनों अपने चमत्कार के योगसे ही होते है, उसी
तरह जाग्रत्कालीन संवेद्य भी संवित् के चमत्कारमात्र से ही होते हैं