Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 76
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 76 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 76
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, प्रिय-अप्रिय शब्द आदि विषयों का अनुभव जन्मरूप अनन्त
दुःख का हेतु है और चिदेकरसस्वभाव में प्रतिष्ठित असंवित्ति यानी विषयों का अदर्शन पुनर्जन्म से
वर्जित नित्य आत्मस्वरूप सुख का हेतु है