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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 75

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 75 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 75

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

उक्त प्रतिभास का मार्जन न करना ही बड़े भारी संसार के साथ आत्मा का संसर्ग करना है और उसका परिमार्जन करना ही मोक्ष है, यह अनुभवसिद्ध बात है