Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 86
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 86 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 86
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हिन्दी अर्थ
इसलिए वह घटादि आकार वृत्तियो का
त्याग करनेवाला योगी चलते, बैठते, स्पर्श करते ओर सूँघते इन सब अवस्थाओं मेँ भी अजड, आनन्द
से पूर्ण ओर सुखी कहा जाता है