Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 87
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 87 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 87
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हिन्दी अर्थ
हे असीम गुणों के सागर श्रीरामजी, प्राणायाम आदि परिश्रम से
साध्य यत्नपूर्वक चेष्टा से इस जाड्यरहित संविदरूपी दृष्टि का अवलम्बन कर आप दुःख सागर के पार
तैर जाइए