Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
विचारोत्थात्मविज्ञानं ज्ञानमंग विदुर्बुधाः ।
ज्ञेयं तस्यान्तरेवास्ति माधुर्यं पयसो यथा ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे प्रिय श्रीरामजी, वासनाक्षय, आत्मविज्ञान और मनोनाश इन तीनों का एक साथ प्रयत्नपूर्वक
आपको सेवन करना चाहिए, उस सेवन से आप लिप्त नहीं होगे अर्थात् लिप्त नहीं करनेवाले
स्वभाव में स्थित हो जायेंगे