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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

सम्यग्ज्ञानसमालोकः पुमान्ज्ञेयमयः स्वयम् भवत्यापीतमैरेयः सदा मदमयो यथा ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार कमलनाल के उच्छेदन से बिसतन्तु टूट जाते हैं, वैसे ही भली प्रकार उन तीनों का चिरकाल तक अभ्यास करने से अत्यन्त दृढ़ हृदयग्रन्थिर्योँ (अन्तःकरण एवं उसके धर्म आदि के अध्यास) निःशेषरूप से टूट जाती हैं