Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
समं स्वरूपममलं ज्ञेयं ब्रह्म परं विदुः ।
ज्ञानाभिगममात्रेण तत्स्वयं संप्रसीदति ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वासनाक्षय आदि तीनों का भी चिरकाल तक अभ्यास क्यो करना चाहिए ? इस पर कहते हैँ ।
हे श्रीरामजी, यह संसार की स्थिति सैकड़ों जन्मान्तरों से मनुष्यों के द्वारा अभ्यस्त है, अतः
उन उपायों का चिरकाल तक अभ्यास किये बिना कहीं पर भी वह नष्ट नहीं हो सकती