Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
षड्रसेषु विचित्रेषु लेह्यपेयविलासिषु ।
फलेष्वन्येषु मूलेषु शाकेष्वप्यामिषेषु च ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
अध्यात्मविद्या ओर
साधुसंगति इन दो उपायों से युक्त प्रदर्शित दो प्रकार के योगों को छोडकर अन्य किसी उपाय से
दुर्दान्त मन का जय उस प्रकार नहीं कर सकते, जिस प्रकार मदमत्त दुष्ट हाथी का अंकुश के विना
दूसरे उपाय से जय नहीं कर सकते