Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
मदिरामधुमैरेयमाध्वीकासवभूमिषु ।
दधिक्षीरघृतामिक्षानवनीतौदनादिषु ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
हठयोग के अभ्यास की यदि शक्ति न रहे, तो राजयोग का अभ्यास करना चाहिए, यह कहते है।
हे श्रीरामजी, अथवा इस उपाय को छोडकर अन्य उपाय से यदि आप चित्त के ऊपर आक्रमण
करना चाहते हँ, तो बहुत काल के अनन्तर उस पद को प्राप्त करेगें