Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
ज्ञानवान्पिण्डखर्जूरकदम्बपनसादिषु ।
मृद्वीकौर्वारुकाक्षोटबिम्बजम्बीरजातिषु ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, बुद्धिमान् पुरुष को एकाग्र चित्त से एकान्त में बैठकर प्राणवायु के स्पन्दन पर
विजय पाने के लिए बार बार खूब यत्न करना चाहिए