Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
केषुचिद्दर्शनं श्रीमान्नाभिवाञ्छत्यसक्तधीः ।
परिपूर्णमना मानी मौनी शत्रुषु चाचलः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
बतलाई गई इन चार युक्तियों का त्यागकर जो पुरुष चित्त या
चित्त के निकटवर्ती अपने शरीर को स्थिर करने के लिए दूसरा यत्न करते हैं उन पुरुषों को ज्ञानमार्ग
के साम्प्रदायिक लोग वृथा परिश्रमी कहते हैं