Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
ज्ञानवान्कुन्दमन्दारकह्लारकमलादिषु ।
कुमुदोत्पलपुन्नागकेतक्यगुरुजातिषु ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
सत्-शास्त्रोक््त मार्ग से भरष्ट होने के कारण उन्हें अनर्थ परम्परा ही प्राप्त होती है, चित्त जय
प्राप्त नहीं होता, यह कहते हैं ।
श्रीरामजी, वे वृथाश्रमी लोग, एक भय से दूसरा भय, एक दुःख से दूसरा दुःख प्राप्त करते हैं।
भाग्यहीन पापी जन्तुओं की नाई वे कहीं भी उत्तम धेर्यरूपी विश्रान्ति प्राप्त नहीं करते