Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 72
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 72
संस्कृत श्लोक
आदावन्ते च यन्नास्ति वर्तमानेऽपि तस्य च ।
कंचित्काललवं दृष्टा सत्तासौ संविदो भ्रमः ॥ ७२ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रतिपादित अर्थ की सिद्धि में युक्ति बतलाते हैँ।
श्रीरामजी, जिसकी आदि और अन्त में अस्तिता है नहीं; उसकी यदि वर्तमान काल में यानी
बीच में कुछ-काल तक सत्ता देखी जाय तो वह संवित् का एक भ्रम ही है