Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 73
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
इति मत्वा धियं त्यक्त्वा भावाभावानुपातिनीम् ।
निःसङ्गसंविद्भारूपो भव भावान्तमागतः ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र, इस
उक्त अर्थ का युक्तिपूर्वक मनन से दृढ़ीकरण कर तथा “यह भावरूप है ओर यह अभावरूप है” इस
प्रकार विकल्पयुक्त मति का त्यागकर भाव के बाधस्वरूप ब्रह्म में प्राप्त होकर आप संगशून्य
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