Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 77
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 77 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 77
संस्कृत श्लोक
गतसङ्गमना दृष्ट्या पश्यन्नपि न पश्यति ।
एतदन्यस्थचित्तत्वाद्वालेनाप्यनुभूयते ॥ ७७ ॥
हिन्दी अर्थ
विषयों के साथ संसर्ग से शून्य अन्तःकरणवाला महात्मा चक्षु से विषयों को देख
रहा भी उन्हें नहीं देखता, क्योंकि उसका चित्त तो अन्यत्र परब्रह्म मेँ लगा हुआ है । जिसका चित्त
अन्यत्र रहता है, वह विषय नहीं देखता, यह बात बालक को भी ज्ञात है