Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 76
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 76 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 76
संस्कृत श्लोक
गतसङ्गां मतिं कुर्वन्कुर्वन्नप्यङ्गयष्टिभिः ।
न लिप्यते सुखैर्दुःखैर्मनोरथदशास्विव ॥ ७६ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा में अकर्तापन ओर अभोक्तापन का अनुभव हो जाने के कारण बुद्धि को वीतसंग बना रहा
तथा शरीर आदि उपकरणों से व्यवहार निरत हो रहा भी ज्ञानी सुखदुःखात्मक अनुकूल प्रतिकूल
भावों से उस तरह लिप्त नहीं होता, जिस तरह मनोराज्य के वैभवों के आगमापायों से अज्ञानी लिप्त
नहीं होता