Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 95
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 95 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 95
संस्कृत श्लोक
जीवन्मुक्तमतिर्मौनी निगृहीतेन्द्रियग्रहः ।
अमानमदमात्सर्यमार्यस्तिष्ठति विज्वरम् ॥ ९५ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवन्मुक्तो के ज्ञान से सम्पन्न, मौनव्रतधारी
और इन्द्रियरूपी पाशो को वश में रखनेवाला ज्ञानवान् आर्यपुरुष मान, मद ओर मात्सर्य से रहित
तथा चिन्ताज्वर से शून्य होकर स्थित रहता है