Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 94
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 94 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 94
संस्कृत श्लोक
असङ्गतामनायासाज्जीवन्मुक्तस्थितिं स्थिराम् ।
अवलम्ब्य समः स्वस्थो वीतरागो भवानघ ॥ ९४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
अनघ, असंगता ही बिना परिश्रम से सिद्ध हुई सुदृढ़ जीवन्मुक्त की अवस्था हे, अतःउसका अवलम्बन
कर आप एकरूप, स्वस्थ ओर वीतराग हो जाइए