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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 93

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 93 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 93

संस्कृत श्लोक

संवेद्यो यदि चैवात्मा वेदिते लक्ष्यते समः । यथाप्राप्तानुवर्ती च तदसङ्गोऽसि राघव ॥ ९३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे राघव, संवेद्य पदार्थ चित्स्वभाव ही है, ज्ञान होने पर वह यदि आपको एकरूप लक्षित होता है और यदि आप जिस समय जैसे व्यवहार प्राप्त हुआ, तदनुसार वर्तन करते हैं, तो आप असंग हैं