Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 92
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 92 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 92
संस्कृत श्लोक
विहरन्व्यवहारेषु सुखदुःखदशासु च ।
न विमुञ्चसि सत्साम्यं तदसङ्गोऽसि राघव ॥ ९२ ॥
हिन्दी अर्थ
व्यवहारो एवं सुखदुःख की अवस्थाओं में
विचरण करते हुए भी आप यदि ब्रह्मैकरसता छोड़ते नहीं, तो आप असंग ही हैं