Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 1, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 1, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 1 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
भ्रमद्भ्रमरपक्षोत्थवातधूतरजस्यलम् ।
कौमुदे परिविश्रान्ते चामरेष्वक्षिपक्ष्मसु ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रश्न का
उत्तर मैंने भार्गवोपाख्यान में संक्षेप से कह दिया है; लेकिन आपको अनधिकारी देख कर उसे विस्तार
से पूरा नहीं कहा । इसीलिए आपको स्पष्टरूप से वह परिज्ञात नहीं हुआ