Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 1, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 1, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 1 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
तेन तत्तारमप्याशु वचोऽन्तर्धानमाययौ ।
मौनं जलदनादेन मायूर इव निस्वनः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरा उपदेश तो द्वार प्रदर्शनमात्र है, आपको एकाग्रता से स्वयं आत्मदर्शन करना होगा, ऐसा कहते हैं ।
संसारी आत्मा को भी आत्मा जानता है, क्योंकि आत्मा ने ही मालिन्यवश आत्मा को संसारी
बनाया है। वह आत्मा ही आत्मज्ञान से निर्मल होकर वास्तविक पूर्ण आत्मा को प्राप्त होता है यानी तद्रूप
हो जाता है