Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 1, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 1, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 1 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
रामलक्ष्मणशत्रुघ्नाः प्रहरत्रयमेव तत् ।
वासिष्ठमुपदेशं ते चिन्तयामासुरक्षतम् ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न इन तीनों भ्राताओं ने तीन प्रहर तक महर्षि के उपदेश का निरन्तर विचार किया