Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
परिज्ञाय परित्यागो वासनानां य उत्तमः ।
सत्तासामान्यरूपत्वं तत्कैवल्यपदं विदुः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मतत्त्व को जानकर वासनाओं का जो उत्तम यानी अशेष परित्याग हे, उसे ही सत्तासामान्यरूप
मोक्षपद कहा गया हे