Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विचार्यार्यैः सहालोक्य शास्त्राण्यध्यात्मभावनात् ।
सत्तासामान्यनिष्ठत्वं यत्तद्ब्रह्म परं विदुः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मवेत्ता गुरु आदि के साथ शास्त्रों का विचार कर अध्यात्मभावना से अर्थात् मननपूर्वक
निदिध्यासन से तत्त्व का साक्षात्कार करके सत्तासामान्य में जो निष्ठा होती है, उसी निष्ठा को मुनि
लोग परब्रह्मपद कहते हैं