Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अन्तः सुप्ता स्थिता मन्दा यत्र बीज इवाङ्कुरः ।
वासना तत्सुषुप्तत्वं विद्धि जन्मप्रदं पुनः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
स्थावर शरीरो में वह पद अत्यन्त दूर है, इसका उपपादन करते है ।
श्रीरामजी, जहाँ भीतर बीज में अंकुर की नाई अव्यक्त, अतएव सुप्त-सी वासना स्थित है, उसे
ही आप पुनर्जन्म को देनेवाली सुषुप्ति की नाई जानिए