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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

यत्रास्ति वासनाबीजं तत्सुषुप्तं न सिद्धये । निर्बीजा वासना यत्र तत्तुर्यं सिद्धिदं स्मृतम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

जहाँ वासना का बीज विद्यमान है, वह सुषुप्ति जन्म के लिए ही है, सिद्धि के लिए नहीं है और जिसमें ज्ञानाग्नि से वर्जित बीजशक्तिवाली वासना है, वह तुर्यपद मोक्षरूप सिद्धि को देनेवाला हे