Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यथा बीजेषु पुष्पादि मृदो राशौ घटो यथा ।
तथान्तः संस्थिता साधो स्थावरेषु स्ववासना ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
स्थावर आदि में वासना ही नहीं रहती, इस प्रकार किसी मन्दमति की शंका का परिहार करते हैं।
हे साधो, जिस तरह बीजों में अंकुर से लेकर पुष्प तक पदार्थ स्थित हैं एवं जिस तरह मिट्टी के ढेर
में घट स्थित है, उसी तह स्थावरो के भीतर अपनी वासना भी स्थित है