Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
स्थावरादय एते हि समस्ता जडधर्मिणः ।
सुषुप्तपदमारूढा जन्मयोग्याः पुनःपुनः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
पत्थर की नाई व्यापारशून्य ये
सभी स्थावर आदि पदार्थ 'सुषुप्त” नाम को प्राप्त होने के कारण पुनः-पुनः जन्म के भागी होते हैं