Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
निर्दग्धवासनाबीजसत्तासामान्यरूपवान् ।
सदेहो वा विदेहो वा न भूयो दुःखभाग्भवेत् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानाग्नि से निःशेष भस्म किया गया वासनाबीज से जिसने सत्तासामान्यरूपता प्राप्त कर ली है,
ऐसा तत्त्ववेत्ता चाहे सदेह हो या विदेह हो, पुनः कभी दुःख का भागी नहीं होता