Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
चिच्छक्तिर्वासनाबीजरूपिणी स्वापधर्मिणी ।
स्थिता रसतया नित्यं स्थावरादिषु वस्तुषु ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
स्थावरादि समस्त पदार्थ मेँ चित् को आवृत करनेवाली चित्-शक्तिरूपा बीजस्वरूप वासना
धान्यादि बीजों मे अंकुरशक्ति जननस्वरूप रसकी नाई सदा अवस्थित है