Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
बीजेषूल्लासरूपेण जाड्येन जडरूपिषु ।
द्रव्येषु द्रव्यभावेन काठिन्येनेतरेषु च ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
वही चितृशक्त्ि बीज आदि आदि सभी कारणों मे नानारूपे स्थित है, यों कहते हैं।
वही चित्शक्ति बीज में उल्लासरूप से (पृथ्वी ओर जल के संयोग से होनेवाली प्रफुल्लता से
अनुभूयमान अंकुरजनन शक्ति से), जडधर्मवाले पदार्थों में जड़तारूप से, धन, रत्न आदि द्रव्यो में
स्पृहणीयता में कारणभूत भव्यतारूप से, शिला आदि अन्य पदार्थों में कठिनता रूप से स्थित है