Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
इतीयमखिला दृश्यदशामापूर्य संस्थिता ।
यथा घटापटा प्रावृडम्बरालम्बिनी तथा ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
मेघजाल ही जिसका आच्छादक है, ऐसी वर्षा ऋतु
जिस प्रकार आकाश को सर्वतः व्याप्त कर स्थित रहती है, उसी प्रकार यह अखिल चित्शक्ति सम्पूर्ण
दृश्यदशा को व्याप्त करके स्थित है