Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
आत्मा शक्तिः पदार्थेषु तथा घटपटादिषु ।
सर्वत्र सत्तासामान्यरूपमाश्रित्य तिष्ठति ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
घट, पट आदि सभी पदार्थो में आत्मा ही सत्तासामान्यरूपका ग्रहण कर जलाहरण, शीतनिवारण
आदि नानाशक्ति होकर स्थित रहता है