Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
आत्मदृष्टिरदृष्टैषा संसारभ्रमदायिनी ।
दृष्टा सती समग्राणां दुःखानां क्षयकारिणी ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, आत्मदर्शन के विरोधी अज्ञान से आवृत हुई यह आत्मदुष्टिरूपा चित्शक्ति
संसाररूप भ्रम को देती है, और उसके विरोधी अज्ञान से अनावृत हुई सम्पूर्णं दुःखों का क्षय कर
देती है