Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
नाविद्या क्वचिदप्यस्ति ब्रह्मैवेदमखण्डितम् ।
सदसत्कलनास्फारमशेषं येन मण्डितम् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
अविद्यानाम की वस्तु भी नहीं है, यह सब जगत अखण्डित ब्रह्मस्वरूप ही है, जिसने सत् एवं
असत् कल्पना के विस्तारभूत इन सम्पूर्ण जगत का निर्माण किया है