Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 10, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
एतावदेवाविद्याया नेदं ब्रह्मेति निश्चयः ।
एतदेव क्षयो यस्या ब्रह्मेदमिति निश्चयः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसी अवस्था मे अविद्या ओर उसके क्षय का फलित निष्कृष्टस्वरूप कहते हैं।
थह सम्पूर्ण जगत ब्रह्मस्वरूप नहीं है ' इत्याकारक निश्चय ही अविद्या का स्वरूप है और "यह
जगत ब्रह्मरूप है” यह निश्चय ही उसका विनाश है