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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 100, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 100, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 100 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

असंकल्पनमात्रेण सम्यग्ज्ञानोदयात्मना । संकल्पः क्षीयते सिद्ध्यै स्वयमेवासदात्मकः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

असंकल्प द्वारा पर्यवसित तत्वज्ञान से वह चित्त नष्ट हो जाता है, यह कहते है। सम्यग्‌ ज्ञानोदय के हेतुभूत असंकल्पमात्र से असदात्मक संकल्पस्वरूप चित्त स्वयं ही मोक्षसिद्धि के लिए क्षीण हो जाता है