Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 100, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 100, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 100 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
देशकालवशात्सर्वे हेतुमन्तः प्रमाणगाः ।
अकर्तृब्रह्मविषयः प्रमा कारणयोः कथम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसमें बीजादि हेतुओं का अभाव कैसे है, यदि ऐसी शंका हो, तो इसका उत्तर यह है कि प्रमाण से
सिद्ध उसके उचित देश और काल नहीं है, इसीको कहते हैं।
देशऔर काल के वश से सभी पदार्थकारण से युक्त और प्रमाण से गम्य होते हैं। तब तो ब्रह्मविषयक
प्रमा में ही निमित्त और उपादान कारण विषय रहें; तो यह युक्त नहीं है, क्योकि विरोध है, यह कहते हैं ।
जिस प्रमाण का कर्ता आदि कारकमात्र का विरोधी ब्रह्म विषय है, उससे हेतु और उपादान कारण
की प्रमा उत्पन्न होती है, यह कैसे बोल सकते हैं ?